जो किसी का नहीं, वो जनसुराज का? बिहार में नया सियासी ट्रेंड!
बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नया सियासी ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जो नेता, अभिनेता या अभिनेत्री पारंपरिक राजनीतिक दलों से टिकट पाने में असफल हो रहे हैं, वे अब प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जनसुराज’ की ओर रुख कर रहे हैं। जनसुराज धीरे-धीरे ऐसी पार्टी बनती जा रही है जिसे लोग “जिसका कोई नहीं, उसका जनसुराज” कहने लगे हैं। हाल ही में लोकगायक और पूर्व सांसद रितेश पांडे के शामिल होने से इस विचार को और बल मिला है। अब चर्चा में हैं ज्योति सिंह, जो हालांकि अभी तक औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल नहीं हुई हैं,
लेकिन उन्होंने प्रशांत किशोर से मुलाकात की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे करकट विधानसभा सीट से जनसुराज के टिकट पर आगामी चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिर भी यह साफ़ है कि जनसुराज बिहार की राजनीति में एक नया विकल्प बनकर उभर रहा है, जहाँ से अब वे चेहरे भी अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं जिन्हें अन्य दलों में अवसर नहीं मिल पा रहा।
ज्योति सिंह की प्रशांत किशोर से मुलाकात – राजनीतिक मदद या कुछ और?
ज्योति सिंह इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। पवन सिंह के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाने और एफआईआर दर्ज कराने के बाद अब वे एक और वजह से चर्चा में हैं—उनकी मुलाकात प्रशांत किशोर से। बताया जा रहा है कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक रणनीति को लेकर नहीं थी, बल्कि ज्योति सिंह अपने मामले में मदद के लिए प्रशांत किशोर के पास पहुंची थीं। हालांकि यह भी सच है कि प्रशांत किशोर सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि जनसुराज पार्टी के संस्थापक हैं, और चुनावी मौसम में उनसे किसी भी चर्चित चेहरे की मुलाकात को सिर्फ ‘निजी’ नहीं माना जा सकता। कुछ लोगों का मानना है
ज्योति सिंहकि ज्योति सिंह को संभवतः अन्य दलों से टिकट नहीं मिल रहा, इसलिए वे अब जनसुराज का विकल्प तलाश रही हैं। ऐसे में यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाले चुनाव में वे करकट या किसी अन्य सीट से जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं। उनके पास लोकल स्तर पर अच्छी पकड़ और अब राष्ट्रीय स्तर की पहचान भी है, जिससे वे किसी भी पार्टी के लिए उपयोगी उम्मीदवार बन सकती हैं। हालांकि अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि ज्योति सिंह आने वाले समय में राजनीतिक मैदान में भी कदम रख सकती हैं।
पवन सिंह और ज्योति सिंह, इन दिनों लगातार विवादों में घिरे हुए हैं।
भोजपुरी इंडस्ट्री की चर्चित जोड़ी में से एक, पवन सिंह और ज्योति सिंह, इन दिनों लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाज़ी कर रहे हैं, जिससे यह मामला अब केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़ा मीडिया मुद्दा बन चुका है। जहां पवन सिंह अपने इंटरव्यूज़ में यह कह रहे हैं कि वे अपनी पीड़ा और दुख को खुलकर व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं, वहीं उन्हें यह भी शिकायत है कि लोग उनके दर्द को समझने की कोशिश नहीं कर रहे हैं और ज्योति सिंह के पक्ष में सहानुभूति ज़्यादा दिखाई जा रही है। दूसरी ओर, ज्योति सिंह ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि पवन सिंह उनसे लगातार संपर्क करने की कोशिश करते हैं,
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लेकिन खुद सामने आकर बात नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि पवन सिंह का परिवार उनसे ठीक व्यवहार नहीं करता और बात करने से रोकता है। यह विवाद उस समय और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया जब ज्योति सिंह लखनऊ में पवन सिंह के आवास पर पहुंचीं और वहां से लाइव वीडियो के ज़रिए अपनी बात रखी। इस घटना के बाद से यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक चर्चा का केंद्र बन गया है। दोनों के बीच का यह टकराव अब सिर्फ निजी नहीं रहा, बल्कि भोजपुरी सिनेमा और जनता के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।