श्याम बहादुर सिंह बनकर रह गए, चुनावी जुमले नहीं दिखा पाए असर ?

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बरहरिया विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके श्याम बहादुर सिंह  तीसरी बार के चुनाव में हार गए थे। वे बहुत कम अंतर से — लगभग पाँच हज़ार से कम वोटों से पराजित हुए। चौथी बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। शुरुआती दिनों में उनके नाम की काफी चर्चा रही और उन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे मतदान की तारीख नज़दीक आई, उनका प्रभाव धीरे-धीरे घटता गया। परिणामस्वरूप, इस बार उन्हें बहुत कम वोट मिले। कभी अपने दम पर जीत का दावा करने वाले शाम बहादुर सिंह इस चुनाव में नाकाम और असफल साबित हुए।

श्याम बहादुर सिंह
श्याम बहादुर सिंह

आरजेडी को फायदा या नुकसान?

बरहरिया विधानसभा सीट से श्याम बहादुर सिंह के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से माना जा रहा था कि उनका असर एनडीए के वोटों पर पड़ेगा और इसका फायदा आरजेडी प्रत्याशी अरुण गुप्ता को मिल सकता है। लेकिन चुनावी मैदान में ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। शाम बहादुर सिंह की वोट-कटौती अपेक्षा के अनुसार नहीं हो पाई है, जिससे आरजेडी को खास लाभ नहीं मिला। वहीं, एनडीए प्रत्याशी इंद्रदेव सिंह पटेल (जेडीयू) लगातार मजबूत स्थिति में दिख रहे हैं। अब मुकाबला अरुण गुप्ता और इंद्रदेव सिंह पटेल के बीच बहुत कम अंतर से तय होता नजर आ रहा है।

Siwan के कई सीटों पर चुनावी रणभूमि गर्म, उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर

Siwan जिले में इस बार चुनावी स्थिति असामान्य नजर आ रही है। यह कहना मुश्किल है कि कौन चुनाव जीत रहा है और कौन हार रहा है, क्योंकि हर सीट पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। पहले जिले की कई सीटों पर RJD का प्रभुत्व था, लेकिन इस बार स्थिति बदल सकती है। हर उम्मीदवार अपनी शक्ति सीमित रखते हुए चुनाव मैदान में उतरे हैं, जिससे मुकाबला और जटिल हो गया है। रघुनाथपुर सीट से ओसामा साहब चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं जीसू सिंह इंडिया प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं दोनों का एक अलग पहचान है और दोनों ही अपना एक अलग पहचान बनाकर वहां पर रखे हुए हैं दोनों में से कोई उम्मीदवार काम नहीं है दोनों में से किसी का पलड़ा अभी अकल न निकलना श्याम बहादुर सिंह

श्याम बहादुर सिंहमुश्किल है वही सिवान सदर विधानसभा से अमित बिहारी चौधरी जो की जमीनी नेता के रूप में प्रसिद्ध है और बहुत दफा यह विधायक रह चुके हैं तो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं मंगल पांडे हालांकि यह बिना चुनाव लड़े बहुत बड़ा सभा का के थ्रू यह वहां का मंत्री भी रह चुके हैं तो कांटे की टक्कर इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में है और साथ ही साथ बढ़िया विधानसभा क्षेत्र तो एक अलग पहचान के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि सर श्याम बहादुर सिंह इस बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में आए हैं और इन्हें यहां के बड़े-

Siwan Sadar: यहाँ मंगल पांडे और अवध बिहारी चौधरी के बीच कांटे की टक्कर है।

बड़े नेता जो चुनावी सभा करते हुए आए जैसे सम्राट चौधरी ने भी ने वोट कटवा का रूप बताया और इनका हवा स्टार्टिंग में काफी ज्यादा था जो कि अब काम होते हुए दिखाई दे रहा है तो इन तीनों ही क्षेत्र में सिवान जिले में काफी कैट की टक्कर वाली लड़ाई है

Raghunathpur: यहाँ शाहबुद्दीन के बेटे और अन्य प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनके सामने NDA उम्मीदवारों की भी मजबूत चुनौती है।

इन सभी सीटों पर इस बार जीत का अंतर बहुत कम रहने की संभावना है। चाहे जीत मंगल पांडे की हो, जो पहले बिहार के मंत्री रह चुके हैं, या अवध बिहारी चौधरी की, जो पूर्व मंत्री और स्पीकर रह चुके हैं — अंतिम नतीजे 14 तारीख को घोषित होने पर ही साफ होंगे

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