बिहार सरकार :चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेंशन की राशि को ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 कर दिया था। यह बढ़ी हुई राशि आज दूसरी बार सभी लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है।
चुनाव से पहले तक पेंशन योजना को लेकर इतनी सक्रियता नहीं दिखाई दे रही थी, लेकिन जब से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव की तैयारियों के बीच जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से पेंशन में सुधार की आवाज़ उठाई, तब से इस योजना में तेजी आई। मुख्यमंत्री द्वारा पेंशन राशि बढ़ाए जाने के बाद प्रदेश के लोगों में एक विशेष प्रकार की प्रसन्नता और संतोष देखने को मिला। यह दूसरी बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बढ़ी हुई पेंशन समय पर प्राप्त हुई है।
बिहार सरकार द्वारा कितने करोड़ रुपये पेंशन के तहत खर्च किए गए?
बिहार सरकार ने एक करोड़ 12 लाख लोगों के खाते में पेंशन के रूप में राशि ट्रांसफर की है। पहले यह पेंशन मात्र ₹400 थी, जिसे अब बढ़ाकर अधिक कर दिया गया है। इस वृद्धि से लोगों में एक अलग प्रकार की खुशहाली देखने को मिल रही है। पेंशन बढ़ाए जाने के बाद यह दूसरा मौका है जब सरकार ने इस योजना को जारी रखा है। इसके कारण पेंशन आने से पहले ही लोग बहुत उत्साहित और उत्सुक रहते हैं, और पेंशन मिलने के बाद कई लोग अत्यंत खुश महसूस करते हैं।
बिहार सरकार के पेंशन राशि बढ़ाने के बाद आलोचनाएँ क्यों शुरू हुई हैं?
बिहार सरकार पहले पेंशन केवल ₹400 देती थी, लेकिन कुछ समय से बिहार के विपक्षी पार्टियों ने पेंशन राशि बढ़ाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। विपक्षी पार्टियां अलग-अलग रकम की पेशकश करने लगीं, जैसे कोई पार्टी ₹1500 देने का दावा करती तो कोई ₹2000 देने का। इस स्थिति के कारण कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं चलने लगीं।
इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फैसला लिया कि
बिहार में पेंशन राशि को चार वर्षों से स्थिर रहने के बाद अब बढ़ाया जाएगा। हालांकि, कई आलोचक कहते हैं कि इससे पहले नीतीश कुमार पेंशन क्यों नहीं बढ़ाते थे। खासतौर पर यह भी सवाल उठाया जाता है कि पेंशन राशि चुनावों से ठीक चार-पांच महीने पहले क्यों बढ़ाई गई। इसी वजह से विपक्षी पार्टियां और कई लोग यह कहते हुए दिखते हैं कि बिहार सरकार ने पेंशन राशि तब ही बढ़ाई जब विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया।
बिहार सरकार के पेंशन बढ़ाने के बाद बहुत से लोग अपनी खुशी भी जाहिर कर रहे हैं।
बिहार सरकार द्वारा पेंशन राशि बढ़ाने के बाद कई लोग अपनी खुशी भी व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेंशन देर से सही, बढ़ाई गई तो अच्छी बात है, भले ही यह चुनाव से ठीक पहले हुई हो। हालांकि विपक्षी दल इस बात का श्रेय लेते हैं कि उनकी आवाज़ के कारण पेंशन बढ़ाई गई, फिर भी कई लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने अलग-अलग फंड भी जारी करने शुरू किए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में
125 यूनिट बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा की। साथ ही, सरकारी स्कूलों में काम करने वाली खाना बनाने वाली महिलाओं की भी सैलरी दोगुनी कर दी गई है।
विपक्षी पार्टियां जितने भी मुद्दे उठा रही हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी रणनीति के अनुसार उनका जवाब दे रहे हैं, जिसको लेकर कई लोग उनकी प्रशंसा भी कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग कह रहे हैं कि जब वे पहले मुख्यमंत्री थे तब ये काम क्यों नहीं किए गए, और अब विपक्ष की आवाज़ उठाने पर ये कदम क्यों उठाए जा रहे हैं। इसलिए इस मामले पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर बहुत अलग-अलग तरीके से बातें चल रही हैं।
वैसे तो दूसरी बार पेंशन भेजने में सरकार ने कुल ₹1250 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, यानी कि सिर्फ एक महीने में पेंशन देने पर बिहार सरकार ₹1250 करोड़ खर्च कर रही है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग तरीकों से फंड और सुविधाएं सामने आ रही हैं। यह स्थिति दिल्ली चुनाव से पहले जैसी लग रही है, जब कई फंड और मुफ्त सेवाएं दी गई थीं। वैसे ही बिहार सरकार भी चुनाव से पहले विभिन्न फंड और मुफ्त सुविधाएं दे रही है।
बहुत सारे लोगों का यह भी कहना है कि अगर हर चीज़ मुफ्त में सुविधाएं दी जाएंगी, तो महंगाई बहुत अधिक बढ़ जाएगी। महंगाई इसलिए बढ़ेगी क्योंकि सरकार हर सुविधा को मुफ्त में देने के लिए कई तरह के नए टैक्स लागू करेगी, जो अलग-अलग चीज़ों पर लगाए जाएंगे। इसके कारण महंगाई में वृद्धि हो सकती है।
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